Basics of computer networks in hindi language

Basics of computer networks कम्प्यूटर नेटवर्क के बेसिक ....

कम्प्यूटर नेटवर्क के बेसिक विषय पर विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है:

1.    ...कम्प्यूटर नेटवर्क क्या है?....

कम्प्यूटर नेटवर्क एक ऐसा सिस्टम है जिसमें दो या अधिक कम्प्यूटर और अन्य डिवाइसेस आपस में जुड़े होते हैं ताकि वे डेटा, संसाधन और जानकारी साझा कर सकें। नेटवर्क के माध्यम से यूज़र्स विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जैसे फ़ाइल शेयरिंग, प्रिंटिंग, इंटरनेट एक्सेस आदि।



2.      ....नेटवर्क के प्रकार...

a. LAN (Local Area Network):

एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र में फैला होता है, जैसे घर, ऑफिस या स्कूल।

उच्च गति और कम विलंबता प्रदान करता है।

b. WAN (Wide Area Network):

व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में फैला होता है, जैसे विभिन्न शहरों या देशों में।

इंटरनेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

c. MAN (Metropolitan Area Network):

एक शहर या महानगरीय क्षेत्र में फैला होता है।

LAN और WAN के बीच का मध्यवर्ती नेटवर्क होता है।

d. PAN (Personal Area Network):

व्यक्तिगत डिवाइसेस के बीच का छोटा नेटवर्क, जैसे ब्लूटूथ कनेक्शन।

3.     ..... नेटवर्क टोपोलॉजी.....

a. बस टोपोलॉजी (Bus Topology):

सभी डिवाइसेस एक मुख्य केबल से जुड़ी होती हैं।

सरल और सस्ता होता है, लेकिन केबल में समस्या होने पर पूरा नेटवर्क प्रभावित हो सकता है।

b. स्टार टोपोलॉजी (Star Topology):

सभी डिवाइसेस एक केंद्रीय स्विच या हब से जुड़ी होती हैं।

समस्याओं का समाधान करना आसान होता है, लेकिन केंद्रीय डिवाइस फेल होने पर पूरा नेटवर्क डाउन हो सकता है।

c. रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology):

प्रत्येक डिवाइस दो अन्य डिवाइसेस से जुड़ी होती है, जिससे एक बंद वृत्त बनता है।

डेटा एक दिशा में घूमता है, जिससे टकराव की संभावना कम होती है।

d. मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology):

प्रत्येक डिवाइस कई अन्य डिवाइसेस से जुड़ी होती है।

उच्च स्तर की विश्वसनीयता और redundancy प्रदान करता है, लेकिन स्थापना महंगी होती है।

e. हाइब्रिड टोपोलॉजी (Hybrid Topology):

दो या अधिक टोपोलॉजी के मिश्रण से बनता है

लचीला और स्केलेबल होता है।

4. OSI मॉडल (Open Systems Interconnection Model)....m

OSI मॉडल नेटवर्क संचार के लिए एक सैद्धांतिक ढांचा है, जिसमें 7 लेयर होती हैं

1. फिजिकल लेयर (Physical Layer): हार्डवेयर डिवाइसेस और माध्यम।

2. डेटा लिंक लेयर (Data Link Layer): डेटा फ्रेम्स का निर्माण और नियंत्रण

3. नेटवर्क लेयर (Network Layer): पैकेट्स का मार्गदर्शन और रूटिंग।

4. ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport Layer): डेटा ट्रांसफर का विश्वसनीयता।

5. सेशन लेयर (Session Layer): सेशन्स की स्थापना और प्रबंधन।

6. प्रेजेंटेशन लेयर (Presentation Layer): डेटा का रूपांतरण और एन्क्रिप्शन।

7. एप्लिकेशन लेयर (Application Layer): यूज़र इंटरफेस और एप्लिकेशन प्रोटोकॉल्स।

5. नेटवर्क प्रोटोकॉल...

प्रोटोकॉल्स नियमों का सेट होते हैं जो नेटवर्क में डेटा के आदान-प्रदान को नियंत्रित करते हैं:

TCP/IP (Transmission Control Protocol/Internet Protocol): इंटरनेट का मुख्य प्रोटोकॉल।

HTTP (HyperText Transfer Protocol): वेब पेजों के ट्रांसफर के लिए।

FTP (File Transfer Protocol): फाइल ट्रांसफर के लिए

SMTP (Simple Mail Transfer Protocol): ईमेल भेजने के लिए।

6.      .... नेटवर्क हार्डवेयर घटक....

a. राउटर (Router):

विभिन्न नेटवर्क्स को जोड़ता है और डेटा पैकेट्स का मार्गदर्शन करता है।

b. स्विच (Switch):

एक ही नेटवर्क के भीतर डिवाइसेस को जोड़ता है और डेटा फ्रेम्स को डायरेक्ट करता है।

c. हब (Hub):

एक केंद्रीय कनेक्शन पॉइंट प्रदान करता है, लेकिन सभी डेटा को सभी पोर्ट्स पर प्रसारित करता है।

d. मॉडेम (Modem):

डिजिटल डेटा को एनालॉग सिग्नल में और वापस कनवर्ट करता है ताकि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के माध्यम से डेटा भेजा जा सके।

e. नेटवर्क कार्ड (Network Interface Card - NIC):

कम्प्यूटर को नेटवर्क से जोड़ने के लिए आवश्यक हार्डवेयर डिवाइस।

7. IP एड्रेसिंग और DNS..


              ..IP एड्रेसिंग:

प्रत्येक डिवाइस को नेटवर्क में अद्वितीय पहचान के लिए IP एड्रेस दिया जाता है।

  IPv4 और IPv6 दो मुख्य प्रकार हैं।

DNS (Domain Name System):

डोमेन नामों को IP एड्रेस में परिवर्तित करता है, जिससे यूज़र्स वेबसाइट्स को नाम से एक्सेस कर सकते हैं।

8. नेटवर्क सुरक्षा...

नेटवर्क सुरक्षा डेटा और संसाधनों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें शामिल हैं:

फायरवॉल्स (Firewalls): अनधिकृत एक्सेस को रोकते हैं।

एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर: मालवेयर से सुरक्षा प्रदान करता है।

एन्क्रिप्शन: डेटा को सुरक्षित रूप से ट्रांसमिट करने के लिए।

वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN): सुरक्षित और निजी कनेक्शन प्रदान करता है।

9. वायरलेस नेटवर्क...

वायरलेस नेटवर्क्स बिना भौतिक केबल्स के डिवाइसेस को जोड़ते हैं। 

इसके प्रकार:

Wi-Fi: लोकल एरिया नेटवर्क के लिए सबसे सामान्य वायरलेस तकनीक।

ब्लूटूथ: व्यक्तिगत डिवाइसेस के बीच कनेक्शन के लिए

सेल्युलर नेटवर्क्स: मोबाइल डिवाइसेस के लिए विस्तृत कवरेज प्रदान करता है।

निष्कर्ष...

कम्प्यूटर नेटवर्क्स आज के डिजिटल युग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके विभिन्न प्रकार, टोपोलॉजी, मॉडल, प्रोटोकॉल, और हार्डवेयर घटक नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं। नेटवर्क की सुरक्षा और वायरलेस तकनीकों के विकास ने इसे और भी अधिक प्रभावी और उपयोगी बना दिया है।

यदि आपके पास नेटवर्क के किसी विशेष पहलू पर और अधिक जानकारी चाहिए हो, तो कृपया बताएं!

Network Media नेटवर्क मीडिया ...

नेटवर्क मीडिया वह माध्यम होता है जिसके द्वारा नेटवर्क में डेटा या सूचना एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजी जाती है। यह माध्यम तारों, तरंगों, और प्रकाशीय संचार विधियों के रूप में हो सकता है। नेटवर्क मीडिया मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: केबल्ड मीडिया (वायर्ड) और वायरलेस मीडिया। आइए इनका विस्तार से अध्ययन करते हैं



1. केबल्ड मीडिया (Wired Media)

a. ट्विस्टेड पेयर केबल (Twisted Pair Cable):

विवरण: इसमें दो तारों को एक साथ घुमाया जाता है ताकि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हस्तक्षेप (interference) कम हो सके। यह सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली केबल है।

                        ...प्रकार...

यूपीएसटी (Unshielded Twisted Pair - UTP):  यह सबसे सामान्य प्रकार की केबल है,   जिसका उपयोग LAN और टेलीफोन नेटवर्क में होता है।

एसटीपी (Shielded Twisted Pair - STP): इसमें अतिरिक्त शील्डिंग होती है, जिससे यह बेहतर प्रदर्शन और सुरक्षा प्रदान करता है।

उपयोग: LAN, टेलीफोन नेटवर्क, इंटरनेट कनेक्शन।

फायदे: किफायती, आसानी से उपलब्ध, स्थापित करना सरल।

नुकसान: सीमित दूरी और गति, हस्तक्षेप की संभावना।


b. कोएक्सियल केबल (Coaxial Cable):

विवरण: इसमें एक केंद्रीय तार होता है जो इन्सुलेटेड होता है और एक धातु की ढाल (shield) से घिरा होता है।

उपयोग: केबल टीवी नेटवर्क, पुराने LAN नेटवर्क।

फायदे: उच्च बैंडविड्थ, कम हस्तक्षेप।

नुकसान: मोटा और कठोर, स्थापित करना थोड़ा कठिन।

c. फाइबर ऑप्टिक केबल (Fiber Optic Cable):

विवरण: यह केबल प्रकाशीय संकेतों के माध्यम से डेटा संचारित करती है। इसमें एक कांच या प्लास्टिक कोर होता है, जो प्रकाश को संचारित करता है।

                    प्रकार:

सिंगल मोड फाइबर (Single Mode Fiber): लंबी दूरी के संचार के लिए।

मल्टी मोड फाइबर (Multi-Mode Fiber): छोटी दूरी के संचार के लिए।

उपयोग: इंटरनेट बैकबोन, दूरसंचार नेटवर्क, उच्च गति डेटा संचार।

फायदे: उच्च गति, लंबी दूरी पर डेटा ट्रांसमिशन, हस्तक्षेप से मुक्त।

नुकसान: महंगी, स्थापित करना जटिल।

2.  वायरलेस मीडिया (Wireless Media)

a. रेडियो तरंगें (Radio Waves):

विवरण: रेडियो तरंगों के माध्यम से डेटा को संचारित किया जाता है। ये कम फ्रीक्वेंसी पर होती हैं और लंबी दूरी पर प्रसारित की जा सकती हैं।

उपयोग: वाई-फाई, ब्लूटूथ, मोबाइल नेटवर्क।

फायदे: केबल की आवश्यकता नहीं, लंबी दूरी पर संचार।

नुकसान: सीमित बैंडविड्थ, हस्तक्षेप का खतरा।

b. माइक्रोवेव (Microwaves):

विवरण: यह उच्च फ्रीक्वेंसी रेडियो तरंगें हैं, जिनका उपयोग लंबी दूरी के संचार के लिए किया जाता है। इनका सीधी दृष्टि (Line of Sight) में होना जरूरी होता है।

उपयोग: सैटेलाइट कम्युनिकेशन, माइक्रोवेव टावर।

फायदे: उच्च बैंडविड्थ, लंबी दूरी पर संचार।

नुकसान: वातावरणीय बाधाओं (जैसे बारिश) से प्रभावित, लाइन ऑफ साइट की आवश्यकता।

c. इंफ्रारेड (Infrared):

विवरण: इंफ्रारेड तरंगें प्रकाश की तरह होती हैं, जो सीधी दृष्टि में उपयोग होती हैं और अल्प दूरी पर संचार करती हैं।

उपयोग: रिमोट कंट्रोल, छोटी दूरी के डिवाइस संचार।

फायदे: केबल की आवश्यकता नहीं, सस्ती।

नुकसान: सीमित दूरी, अवरोधों के प्रति संवेदनशील।

d. सैटेलाइट (Satellite):

विवरण: सैटेलाइट के माध्यम से डेटा को अंतरिक्ष में भेजा जाता है, और फिर धरती पर पुनः प्राप्त किया जाता है। यह माइक्रोवेव तकनीक का उपयोग करता है।

उपयोग: वैश्विक संचार, टेलीविजन प्रसारण, इंटरनेट।

फायदे: दूरदराज के क्षेत्रों में भी संचार, वैश्विक पहुंच।

नुकसान: महंगी, समय विलंब (latency) अधिक होता है।

3. नेटवर्क मीडिया का चुनाव कैसे करें?

मीडिया का चुनाव निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:

गति (Speed): यदि उच्च गति की आवश्यकता है, तो फाइबर ऑप्टिक सबसे अच्छा विकल्प है।

दूरी (Distance): लंबी दूरी के लिए फाइबर ऑप्टिक और सैटेलाइट उपयुक्त हैं।

लागत (Cost): ट्विस्टेड पेयर केबल और वायरलेस मीडिया कम लागत वाले होते हैं।

पर्यावरणीय कारक (Environmental Factors): बाहरी वातावरण में वायरलेस मीडिया और शील्डेड केबल्स बेहतर होते हैं।

निष्कर्ष:

नेटवर्क मीडिया कम्प्यूटर नेटवर्किंग में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह डेटा के ट्रांसमिशन की गति, गुणवत्ता और दूरी को प्रभावित करता है। सही मीडिया का चुनाव नेटवर्क की आवश्यकताओं और स्थितियों के आधार पर किया जाता है।

Based on Transmission media 

ट्रांसमिशन मीडिया वह माध्यम है जिसके माध्यम से डेटा या सूचना एक डिवाइस से दूसरी डिवाइस तक पहुंचाई जाती है। ट्रांसमिशन मीडिया को मुख्यतः दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

1. भौतिक/निर्देशित मीडिया (Guided Media)

2. अभौतिक/अनिर्देशित मीडिया (Unguided Media)

आइए इन दोनों को विस्तार से समझते हैं

1. भौतिक/निर्देशित मीडिया (Guided Media)

निर्देशित मीडिया वह ट्रांसमिशन मीडिया है जिसमें डेटा को किसी भौतिक माध्यम (जैसे तार, केबल) के माध्यम से भेजा जाता है। इसे वायर्ड मीडिया भी कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं:

a. ट्विस्टेड पेयर केबल (Twisted Pair Cable)

विवरण: इसमें दो तारों को एक साथ घुमाया जाता है ताकि बाहरी विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप को कम किया जा सके।

                       .....प्रकार.....

यूपीएसटी (Unshielded Twisted Pair - UTP): इसमें कोई शील्डिंग नहीं होती है।

एसटीपी (Shielded Twisted Pair - STP): इसमें तारों के चारों ओर शील्डिंग होती है, जो हस्तक्षेप को और भी कम करती है।

उपयोग: LAN (Local Area Network), टेलीफोन नेटवर्क।

फायदे: किफायती, स्थापित करना सरल।

नुकसान: सीमित दूरी और गति, बाहरी हस्तक्षेप के प्रति संवेदनशील।

b. कोएक्सियल केबल (Coaxial Cable)

विवरण: यह एक केंद्रीय तांबे की तार होती है, जो इन्सुलेटेड होती है और एक धातु की ढाल से घिरी होती है। यह सिग्नल को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखती है।

उपयोग: केबल टीवी नेटवर्क, पुराने कंप्यूटर नेटवर्क।

फायदे: उच्च बैंडविड्थ, कम हस्तक्षेप।

नुकसान: स्थापित करना कठिन और अधिक महंगी।

c. फाइबर ऑप्टिक केबल (Fiber Optic Cable)

विवरण: यह केबल प्रकाशीय सिग्नल (light pulses) के माध्यम से डेटा संचारित करती है। इसमें कांच या प्लास्टिक का कोर होता है, जो प्रकाश को संचारित करता है।

                        .......प्रकार........

सिंगल मोड फाइबर (Single Mode Fiber): लंबी दूरी के लिए उपयुक्त।

मल्टी मोड फाइबर (Multi-Mode Fiber): छोटी दूरी के लिए उपयुक्त।

उपयोग: लंबी दूरी के संचार, इंटरनेट बैकबोन, उच्च गति डेटा ट्रांसमिशन।

फायदे: बहुत उच्च गति, लंबी दूरी पर डेटा ट्रांसमिट करने की क्षमता, विद्युत हस्तक्षेप से मुक्त।

नुकसान: महंगी, स्थापित करना जटिल।

2. अभौतिक/अनिर्देशित मीडिया (Unguided

Media)

अनिर्देशित मीडिया वह ट्रांसमिशन मीडिया है जिसमें डेटा को बिना किसी भौतिक माध्यम (केबल या तार) के संचारित किया जाता है। इसे वायरलेस मीडिया भी कहा जाता है। इसमें डेटा को रेडियो तरंगों, माइक्रोवेव, इंफ्रारेड तरंगों या सैटेलाइट के माध्यम से भेजा जाता है। इसके प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

a. रेडियो तरंगें (Radio Waves)

विवरण: यह सबसे सामान्य वायरलेस ट्रांसमिशन मीडिया है, जिसमें कम फ्रीक्वेंसी पर डेटा को प्रसारित किया जाता है।

उपयोग: वाई-फाई, ब्लूटूथ, टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टिंग।

फायदे: लंबी दूरी तक प्रसारित हो सकता है, केबल की आवश्यकता नहीं।

नुकसान: हस्तक्षेप की संभावना अधिक होती है, बैंडविड्थ सीमित होती है।

b. माइक्रोवेव (Microwaves)

विवरण: यह उच्च फ्रीक्वेंसी की रेडियो तरंगें होती हैं। इनका उपयोग लंबी दूरी के संचार के लिए होता है। यह सीधी दृष्टि (Line of Sight) पर निर्भर करता है।

उपयोग: सैटेलाइट कम्युनिकेशन, लंबी दूरी की डेटा ट्रांसमिशन।

फायदे: उच्च बैंडविड्थ, लंबी दूरी तक डेटा ट्रांसमिशन।

नुकसान: सीधी दृष्टि की आवश्यकता होती है, वातावरणीय परिस्थितियों (जैसे बारिश) से प्रभावित हो सकता है।

c. इंफ्रारेड (Infrared)

विवरण: इंफ्रारेड तरंगों का उपयोग छोटी दूरी की वायरलेस संचार में किया जाता है। ये तरंगें सीधी दृष्टि में चलती हैं और भौतिक बाधाओं को पार नहीं कर सकतीं।

उपयोग: रिमोट कंट्रोल, छोटे क्षेत्र नेटवर्क (PAN), लैपटॉप या मोबाइल डिवाइस को जोड़ने के लिए।

फायदे: सस्ती और सरल।

नुकसान: बहुत कम दूरी पर ही प्रभावी, अवरोधों से प्रभावित होती है

d. सैटेलाइट (Satellite)

विवरण: सैटेलाइट तकनीक का उपयोग वैश्विक संचार के लिए किया जाता है। यह माइक्रोवेव सिग्नल का उपयोग करके डेटा को सैटेलाइट से भेजता और प्राप्त करता है।

उपयोग: वैश्विक टीवी प्रसारण, इंटरनेट, लंबी दूरी की वॉइस और डेटा संचार।

फायदे: वैश्विक कवरेज, दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपलब्ध।

नुकसान: उच्च लागत, समय विलंब (latency) अधिक होता है।

ट्रांसमिशन मीडिया का चुनाव कैसे करें?

ट्रांसमिशन मीडिया का चुनाव विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे:

बैंडविड्थ आवश्यकता: यदि उच्च गति की आवश्यकता हो, तो फाइबर ऑप्टिक केबल या माइक्रोवेव उपयुक्त होते हैं।

दूरी: लंबी दूरी के लिए सैटेलाइट, माइक्रोवेव, और फाइबर ऑप्टिक उपयोगी होते हैं।

लागत: ट्विस्टेड पेयर केबल और रेडियो तरंगें सस्ती होती हैं, जबकि फाइबर ऑप्टिक और सैटेलाइट महंगे होते हैं।

पर्यावरणीय स्थितियाँ: यदि नेटवर्क वातावरणीय बाधाओं (जैसे बारिश, पहाड़) से प्रभावित होता है, तो वायरलेस मीडिया चुनने में सावधानी बरतनी चाहिए।

निष्कर्ष:

ट्रांसमिशन मीडिया डेटा के ट्रांसफर की विधि को परिभाषित करता है। विभिन्न प्रकार की मीडिया में भिन्न गति, दूरी, लागत और सुरक्षा के फायदे और नुकसान होते हैं।

 नेटवर्क डिज़ाइन और आवश्यकताओं के आधार पर सही ट्रांसमिशन मीडिया का चयन करना आवश्यक होता है, ताकि डेटा ट्रांसमिशन प्रभावी और कुशल हो सके।

Guided media गाइडेड मीडिया ...

निर्देशित मीडिया (Guided Media) वह ट्रांसमिशन मीडिया है जिसमें डेटा को किसी भौतिक माध्यम (केबल, तार) के द्वारा एक डिवाइस से दूसरी डिवाइस तक भेजा जाता है। इसे वायर्ड मीडिया भी कहा जाता है। इसमें डेटा का प्रवाह एक निश्चित पथ के माध्यम से होता है, जो इस मीडिया को अनिर्देशित मीडिया से अलग करता है। आइए इसके प्रमुख प्रकारों को विस्तार से समझते हैं:

1. ट्विस्टेड पेयर केबल (Twisted Pair Cable)

विवरण: यह सबसे सामान्य और पुरानी प्रकार की केबल है, जिसका उपयोग डेटा और वॉइस ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है। इसमें दो तारों को एक साथ घुमाया जाता है, ताकि बाहरी विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप को कम किया जा सके।



            .......प्रकार......

यूपीएसटी (Unshielded Twisted Pair - UTP): इसमें तारों के चारों ओर कोई अतिरिक्त सुरक्षा शील्डिंग नहीं होती। यह सबसे सामान्य प्रकार है।

एसटीपी (Shielded Twisted Pair - STP): इसमें तारों के चारों ओर एक अतिरिक्त शील्डिंग होती है, जो इसे विद्युत हस्तक्षेप से और सुरक्षित बनाती है।

उपयोग:

LAN (Local Area Network) में

टेलीफोन नेटवर्क में

DSL कनेक्शन के लिए

फायदे:

किफायती और आसानी से उपलब्ध

स्थापित करना सरल

लचीली केबल, जिसे आसानी से मोड़ा जा सकता है

नुकसान:

सीमित दूरी पर प्रभावी

बाहरी हस्तक्षेप के प्रति संवेदनशील

कम बैंडविड्थ

2. कोएक्सियल केबल (Coaxial Cable)

विवरण: यह केबल एक केंद्रीय तांबे के तार से बनी होती है, जिसे इन्सुलेशन से घेरा गया होता है, और इसके चारों ओर एक धातु की ढाल होती है। यह अधिक बैंडविड्थ और बेहतर सिग्नल सुरक्षा प्रदान करती है।



उपयोग:

केबल टेलीविज़न नेटवर्क में

इंटरनेट और पुराने LAN नेटवर्क में

दूरसंचार उद्योग में

फायदे:

उच्च बैंडविड्थ

कम हस्तक्षेप, बेहतर सिग्नल सुरक्षा

लंबी दूरी पर भी डेटा ट्रांसमिट कर सकता है



नुकसान:

महंगी और मोटी केबल, जिसे स्थापित करना मुश्किल हो सकता है

फ्लेक्सिबिलिटी कम होती है

3. फाइबर ऑप्टिक केबल (Fiber Optic Cable)

विवरण: यह अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित केबल होती है, जिसमें डेटा प्रकाशीय संकेतों के रूप में ट्रांसमिट किया जाता है। इसमें एक कांच या प्लास्टिक का कोर होता है, जो प्रकाशीय संकेतों को भेजने और प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।

                ......प्रकार........

सिंगल मोड फाइबर (Single Mode Fiber): यह लंबी दूरी के संचार के लिए उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह कम विक्षेपण (dispersion) के साथ डेटा ट्रांसमिट करता है।

मल्टी मोड फाइबर (Multi-Mode Fiber): यह छोटी दूरी के संचार के लिए उपयुक्त होता है, लेकिन इसमें अधिक विक्षेपण होता है।

उपयोग:

इंटरनेट बैकबोन

दूरसंचार नेटवर्क

उच्च गति डेटा ट्रांसमिशंस 

फायदे:

बहुत उच्च गति से डेटा ट्रांसमिशन

लंबी दूरी पर प्रभावी

विद्युत हस्तक्षेप से मुक्त, सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन

नुकसान:

बहुत महंगी

स्थापित करना जटिल और अधिक तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता

4. गाइडेड मीडिया का चुनाव कैसे करें?

गाइडेड मीडिया का चुनाव विभिन्न आवश्यकताओं और नेटवर्क डिज़ाइन के अनुसार किया जाता है। सही मीडिया चुनने के लिए निम्नलिखित कारकों पर विचार करना चाहिए:

गति और बैंडविड्थ की आवश्यकता: यदि आपको उच्च बैंडविड्थ और तेज़ डेटा ट्रांसमिशन की आवश्यकता है, तो फाइबर ऑप्टिक केबल सबसे उपयुक्त है।

दूरी: लंबी दूरी के लिए फाइबर ऑप्टिक और कोएक्सियल केबल बेहतर होते हैं।

लागत: ट्विस्टेड पेयर केबल सबसे सस्ता विकल्प है, जबकि फाइबर ऑप्टिक सबसे महंगा होता है।

पर्यावरणीय प्रभाव: यदि नेटवर्क बाहरी विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप से प्रभावित हो सकता है, तो एसटीपी या कोएक्सियल केबल का चयन करना उचित होगा।

निष्कर्ष:

निर्देशित मीडिया नेटवर्किंग के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है, जिसमें डेटा को भौतिक माध्यमों के द्वारा ट्रांसमिट किया

 जाता है। हर प्रकार की गाइडेड मीडिया में अपनी-अपनी विशेषताएं और सीमाएँ होती हैं, जो नेटवर्क की आवश्यकताओं और बजट के अनुसार चुनी जाती हैं।


Unguided media अनगाइडेड मीडिया .....

अनिर्देशित मीडिया (Unguided Media) वह ट्रांसमिशन मीडिया है जिसमें डेटा को बिना किसी भौतिक माध्यम (जैसे कि केबल या तार) के संचारित किया जाता है। इसे वायरलेस मीडिया भी कहा जाता है। इसमें डेटा के संचार के लिए रेडियो तरंगों, माइक्रोवेव, इंफ्रारेड तरंगों और सैटेलाइट्स का उपयोग किया जाता है। आइए इसके प्रमुख प्रकारों को विस्तार से समझते हैं:

1. रेडियो तरंगें (Radio Waves)

विवरण: रेडियो तरंगें कम फ्रीक्वेंसी पर काम करती हैं और लंबी दूरी पर संचारित की जा सकती हैं। इनका उपयोग वायरलेस संचार के विभिन्न रूपों में किया जाता है।

उपयोग:

वाई-फाई (Wi-Fi) नेटवर्क

ब्लूटूथ डिवाइस

टेलीविज़न और रेडियो प्रसारण

फायदे:

केबल की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह स्थापित करना सरल हो जाता है।

लंबी दूरी तक डेटा संचारित किया जा सकता है।

विभिन्न उपकरणों के बीच संवाद स्थापित करने में सहायक।

नुकसान:

बैंडविड्थ सीमित होती है।

बाहरी हस्तक्षेप (जैसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण) के प्रति संवेदनशील।

2. माइक्रोवेव (Microwaves)

विवरण: माइक्रोवेव उच्च फ्रीक्वेंसी रेडियो तरंगें होती हैं, जो उच्च बैंडविड्थ डेटा ट्रांसमिशन के लिए उपयोग की जाती हैं। इनका उपयोग मुख्यतः सीधी दृष्टि (Line of Sight) पर निर्भर होता है।

उपयोग:

सैटेलाइट संचार

माइक्रोवेव टावरों के माध्यम से डेटा ट्रांसमिशन

उच्च गति इंटरनेट कनेक्शन

फायदे:

उच्च बैंडविड्थ और डेटा ट्रांसफर की गति।

लंबी दूरी पर संचार करने की क्षमता।

नुकसान:

सीधी दृष्टि की आवश्यकता होती है, जो बाधाओं (जैसे इमारतें, पेड़) के कारण प्रभावित हो सकती है।

मौसम के कारण (जैसे बारिश) सिग्नल कमजोर हो सकता है।

3. इंफ्रारेड (Infrared)

विवरण: इंफ्रारेड तरंगें प्रकाश की एक प्रकार की तरंग होती हैं, जो छोटी दूरी पर संचारित होती हैं। यह तरंगें सीधी दृष्टि में काम करती हैं और भौतिक बाधाओं को पार नहीं कर सकतीं।

उपयोग:

रिमोट कंट्रोल (जैसे टीवी रिमोट)

छोटे क्षेत्र नेटवर्क (Personal Area Network - PAN

डेटा ट्रांसफर के लिए (जैसे मोबाइल डिवाइस के बीच)

फायदे:

सस्ती और आसानी से उपलब्ध।

कम बिजली की खपत।

नुकसान:

सीमित दूरी (आमतौर पर 10 मीटर तक)।

भौतिक अवरोधों के प्रति संवेदनशील।

4. सैटेलाइट (Satellite)

विवरण: सैटेलाइट्स का उपयोग डेटा को पृथ्वी के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। ये माइक्रोवेव सिग्नल का उपयोग करते हैं।

उपयोग:

वैश्विक संचार (जैसे इंटरनेट, टेलीविजन प्रसारण)

मौसम की निगरानी

जीपीएस (GPS) सेवाएं

फायदे:

दूरदराज के क्षेत्रों में भी संचार की सुविधा।

वैश्विक कवरेज, जिससे किसी भी स्थान पर डेटा भेजा जा सकता है।

नुकसान:

उच्च लागत।

डेटा ट्रांसफर में समय विलंब (latency) होता है।

अनिर्देशित मीडिया का चुनाव कैसे करें?

अनिर्देशित मीडिया का चुनाव करते समय निम्नलिखित कारकों पर ध्यान देना आवश्यक है:

दूरी: यदि डेटा को लंबी दूरी पर भेजना है, तो सैटेलाइट और माइक्रोवेव उपयुक्त होते हैं।

गति और बैंडविड्थ: उच्च गति और बैंडविड्थ की आवश्यकता के लिए माइक्रोवेव या सैटेलाइट का उपयोग किया जा सकता है।

लागत: रेडियो तरंगें और इंफ्रारेड अधिक किफायती विकल्प होते हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव: अगर वातावरण में बाधाएँ हैं (जैसे इमारतें, पेड़), तो ऐसे में सीधी दृष्टि की आवश्यकता वाले विकल्पों को चुनने में सावधानी बरतनी चाहिए।

निष्कर्ष:

अनिर्देशित मीडिया डेटा के वायरलेस ट्रांसमिशन के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है। विभिन्न प्रकार के अनिर्देशित मीडिया में अपनी-अपनी विशेषताएँ और सीमाएँ होती हैं। इनका चयन नेटवर्क की आवश्यकताओं, लागत और वातावरण के अनुसार किया जाना चाहिए।

      Learn more 👇 


Introduction of internet & WWW in hindi language




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

80 Shortcut keys in Libreoffice writer english and hindi me

Adding header, footer and note in hindi language

Providing aesthetics to slide & printing in hindi language